छायावादी काव्य की विशेषताएँ || chayavaad kavya ki viseshtaayen

छायावादी काव्य की विशेषताएँ || chayavaad kavya ki viseshtaayen

आत्म अभिव्यक्ति छायावादी कविता में कवियों ने अपने व्यक्तिगत जीवन के निजी प्रसंगों को खोजने का प्रयास किया। अपनी भावनाओं की खुलकर अभिव्यक्ति इन्होंने की। सुख-दुःख से परिपूर्ण कविताएँ खूब लिखी गई। जयशंकर प्रसाद कृत आँसू व पन्त कृत उच्छवास इसका उदाहरण है पन्त जी अपनी प्रियतमा को पूजने की बात करते हैं विधुर उर…

Read More
रीतिकाल : रीतिकालीन काव्य की प्रमुख प्रवृत्तियाँ

रीतिकाल : रीतिकालीन काव्य की प्रमुख प्रवृत्तियाँ

रीतिकाल या श्रृंगारकाल ‘रीति’ शब्द का प्रयोग निश्चित प्रणाली, ढंग और नियम के अर्थ में होता है । अतः रीतिकाल में हमारा अभिप्राय हिन्दी-साहित्य के उस काल से है, जिसमें निश्चित प्रणाली के अनुसार काव्य-कला का विकास हुआ। भक्तिकाल के वाद रीति काल का नाम आता है, जिसका समय संवत् 1700 वे 1900 तक माना…

Read More
महावीर प्रसाद द्विवेदी द्विवेदी युग और द्विवेदीयुगीन काव्यगत विशेषताएँ

महावीर प्रसाद द्विवेदी : द्विवेदी युग और द्विवेदीयुगीन काव्यगत विशेषताएँ

महावीर प्रसाद द्विवेदी और द्विवेदी युग द्विवेदी युग के प्रवर्तक कवि महावीर प्रसाद द्विवेदी का जन्म 1864 ई. में रायबरेली के दौलतपुर नामक ग्राम में हुआ। इन्हीं के नाम पर द्विवेदी युग का नामकरण हुआ। 1903 ई. में ये सरस्वती पत्रिका के सम्पादक बने, 1920 ई. तक इस पत्रिका के सम्पादक बने रहे। गद्य लेखन…

Read More
द्विवेदी युग और द्विवेदी युग की नवजागरण परक चेतना

द्विवेदी युग और द्विवेदी युग की नवजागरण परक चेतना

द्विवेदी युग द्विवेदी युग का नामकरण प्रसिद्ध सर्वस्वीकृत साहित्य नेता आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के नाम पर हुआ। इसे जागरण सुधार काल भी कहा जाता है। भारतीय इतिहास में यह काल ब्रिटिश शासन के दमनचक्र व कूटनीति का काल है। इस युग में दो धाराएँ चल रही थीं अनुशासनवादी व स्वच्छन्दतावादी अनुशासनवादी धारा साहित्य की…

Read More
भारतेन्दु युगीन काव्य प्रवृत्तियाँ II भारतेन्दु युगीन काव्य की विशेषता

भारतेन्दु युगीन काव्य की विशेषता / प्रवृत्तियाँ || bharatendu yug ki visheshta ya pravritti

भारतेन्दु युगीन काव्य (bharatendu yug ki visheshta ya pravritti) भारतेन्दु युगीन कवियों का काव्यफलक अत्यन्त विस्तृत है उनकी रचना प्रवृत्तियाँ एक ओर भक्तिकाल और रीतिकाल से अनुबद्ध हैं, तो दूसरी ओर समकालीन परिवेश के प्रति जागरूकता का भी अभाव नहीं है। भारतेन्दु युगीन काव्य प्रवृत्तियाँ / भारतेन्दु युगीन काव्य की विशेषता प्रवृत्तियों का विश्लेषण निम्नलिखित शीर्षकों…

Read More
भारतेन्दु युग और भारतेंदु युग के प्रमुख कवि और रचनाएँ

भारतेन्दु युग और भारतेंदु युग के प्रमुख कवि और रचनाएँ bhartendu yug ke pramukh kavi aur rachnayen

भारतेन्दु युग आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के रचनाकाल को दृष्टि में रखकर संवत् 1925 से 1950 की अवधि को नई धारा या प्रथम उत्थान की संज्ञा दी। भारतेन्दु युग की व्याप्ति मिश्रबन्धुओं ने 1926-1945 विं तक डॉ. रामकुमार वर्मा 1927-1957 विं तक डॉ. केसरी नारायण शुक्ल 1922-1957 विं तक डॉ. रामविलास शर्मा 1925-1957…

Read More
आधुनिक काल का परिचय - हिन्दी गद्य का उद्भव और विकास - भारतेन्दु युग | 1857 की राज्यक्रान्ति एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण

आधुनिक काल का परिचय – हिन्दी गद्य का उद्भव और विकास – भारतेन्दु युग | 1857 की राज्यक्रान्ति एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण

आधुनिक काल का परिचय भारतीय इतिहास का आधुनिक काल 19वीं शताब्दी से प्रारम्भ होता है। साहित्य में आधुनिक काल का प्रारम्भ भारतेन्दु युग से होता है। आचार्य शुक्ल ने आधुनिक काल की समय-सीमा 1843 ई. से 1923 तक मानी है। आचार्य शुक्ल आधुनिक काल को गद्यकाल, डॉ. रामकुमार वर्मा इसे आधुनिक काल, मिश्र बन्धु इसे…

Read More
घनानंद का जीवन परिचय और साहित्य साधना का परिचय दीजिए।

घनानंद का जीवन परिचय और साहित्य साधना का परिचय दीजिए।

घनानंद का जीवन परिचय ghananand ka jivan parichay काव्य की दृष्टि से घनानन्द कृष्णोपासक भक्त कवियों की पंक्ति में हैं  पर कल – विभाजन की दृष्टि से इनकी गणना रीतिकालीन कवियों में की जाती है। काल इनका जीवन वृत्त भी अन्य कवियों के समान दूसरे कवियों की रचनाओं एवं इतिहासकारों की खोजों के आधार पर…

Read More
केशवदास का साहित्यिक परिचय दीजिए ।

केशवदास का साहित्यिक परिचय दीजिए ।

  केशवदास का जीवन परिचय केशवदास समय विभाग के अनुसार भक्तिकाल में आते हैं पर संस्कृत साहित्य से इतने प्रभावित रहे कि तत्कालीन हिन्दी काव्य-धारा से पृथक होकर वे चमत्कारी कवि हो गए तथा हिन्दी में रीतिग्रन्थों की परम्परा के आदि आचार्य माने गए । केशवदास जाति के धनाढ्य ब्राह्मण थे। वे कृष्णदत्त के पौत्र…

Read More
कविवर बिहारी के जीवन परिचय , भाषा शैली और काव्य कला पर प्रकाश डालते हुए बिहारी सतसई में संकलित दोहों की विशेषताओं का वर्णन कीजिए ।

कविवर बिहारी के जीवन परिचय , भाषा शैली और काव्य कला || bihari ke jeevan parichay bhaṣa shailee aur kavyakal

कविवर बिहारी के जीवन परिचय  महाकवि बिहारी का जन्म संवत १६६० में ग्वालियर के समीप बसुआ गोविन्दपुर में हुआ था। आप मथुरा के चौबे थे। इनकी बाल्यावस्था अधिकतर बुन्देलखण्ड में बीती | तरुणावस्था में ये अपनी ससुराल चले आए। श्री राधाकृष्णदास ने इन्हें कविवर केशवदास का पुत्र स्वीकार किया है किन्तु सतसई में कुछ बुन्देलखण्डी…

Read More